आखिर क्यों न्यायालय में पेंडिंग है 27 मिलीयन केसेस??

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आखिर क्यों न्यायालय में पेंडिंग है 27 मिलीयन केसेस??

आखिर क्यों पेंडिंग है 27 मिलियन केसेस ???

आज भारत की आबादी 11 जनवरी 2019 तक के संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े 1, 361, 815, 472 इतनी बताई जा रही है । विश्व का 17.74% की आबादी केवल भारत की है। विश्व में भारत ने आबादी के मामले में दूसरा स्थान भी पाया है। जिस प्रकार पूरे विश्व में भारत को एक बड़े लोकशाही देश एवं एक मार्केट के रूप में देखा जाता है ठीक उसी प्रकार  आबादी के कारण भारत देश को ऐसे कई मामलों में मुंह की खानी पड़ती है।

आज भी अगर किसी दो व्यक्ति में कलह होता है तो जवाब आता है कि” तुम्हें कोर्ट में घसीट लूंगा”। मामला  चाहे बड़ा हो या छोटा। हर मामले का निपटारा कोर्ट के द्वारा ही होता है। ऐसे वक्त में हर मामला कोर्ट में जाने से देश भर की अदालतों में करोड़ों केसेस पड़े है और भविष्य में भी बढ़ती आबादी के कारण बढ़ते रहेंगे।
यही वजह है कि आज” जस्टिस डिलेड इस जस्टिस डिनाइड “जैसे मुहावरों का प्रयोग किया जा रहा है। इन कोर्ट के मामलों में समृद्ध व्यक्ति बड़ी आसानी से केसेस से राहत पा जाता है तो वहीं दूसरी तरफ एक गरीब परिवार का व्यक्ति कोर्ट रूम में चक्कर काटते काटते अपनी आखरी सांसे गिनता है।
आखिर न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों??? कारण एकमेव है… वह है बढ़ती जनसंख्या..! जिस तेज  गतीं से आज भारत की आबादी बढ़ रही है उससे आने वाले समय में स्थिति बड़ी ही भयावह दिखाई दे रही है । न्यायालय से लेकर पुलिस, सरकारी अस्पताल से लेकर पोस्ट ऑफिस हर जगह वर्क प्रेशर दिखाई पड़ता है।
यह जनसंख्या मुुदे पर आज अगर किसी को कड़े कदम   उठाना चाहिए वह है मौजूदा सरकार एवं न्याय व्यवस्था। दोनों संस्थाओं को न्यायपालिका में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के बजाय देश की जनसंख्या पर लगाम कसने की ज्यादा जरूरत है। इन 5 सालों में अगर कोई टू चाइल्ड पॉलिसी ना बनाई गई तो स्थिति भविष्य में ग्रह युद्ध के बराबर ही देखी जाएगी जिसका खामियाजा आने वाले नस्लों को भुगतना पड़ेगा। और देश भर की अदालतों में 27 मिलियन से 54 मिलीयन केसेस की वृद्धि कब होगी पता भी नहीं चलेगा …!