आम जनता कैसे तय करे उनका राजनेता सच कह रहा है या झूठ

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आम जनता कैसे तय करे उनका राजनेता सच कह रहा है या झूठ

चुनाव के दौर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार चलता ही रहता है। इसमें कोई नई बात नहीं है। कोई फर्जी डिग्री को लेकर अपने विरोधक को घेरता है तो कोई उसके जीवन चरित्र को लेकर घेरता है। कोई उसके घोटाले को उजागर करता है तो कोई उसके कमीशन लेने वाली बातों पर घेरता है।

कैसे परखे अपनी राजनेताओं को?

A राजनेता B राजनेता को घोटालेबाज कहता है। किसी घोटाले को लेकर बार बार A राजनेता B राजनेता पर तोफ दागता है।
अगर हमारी मोटरसाइकिल चोरी हो जाती है तो हम सबसे पहले इस घटना की शिकायत पुलिस स्टेशन में दर्ज करते हैं। इस घटना को लेकर हम घर बैठे बैठे चिल्लाते नहीं है। बल्कि उस चोर को पकड़वाने हेतु अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करते हैं। ताकि वह चोर पकड़ा जाए और भविष्य में किसी अन्य की प्रॉपर्टी चोरी ना करे।
यही तरीका सभी राजनेताओं पर भी लागू होता है। अगर A राजनेता B राजनेता पर घोटाले करने का आरोप लगाता है तो समझ लीजिए वह सभी आरोप फर्जी है। क्योंकि अगर आरोप सच होता तो वह राजनेता मीडिया पर बयानबाजी ना करते हुए सीधे कोर्ट पहुंच जाता। इस स्ट्रेटजी को कहते हैं कन्वींस और कंफ्यूज स्ट्रेटेजी (If cannot Convince ,Confuse) इसके मायने हैं की A राजनेता अपनी झूठी बयानबाजी से B राजनेता पर आरोप लगाकर उसकी छवि धुमिल करता है जिसके वजह से उसका वोट शेयर काफी हद तक गिर जाता है। जिसका परिणाम यह होता है की B राजनेता घोटाले ना करते हुए भी सत्ता से बाहर हो जाता है और A राजनेता सिर्फ आरोप करके सत्ता पर पुनः काबिज हो जाता है।
यह लेख उन सभी सामान्य जनता के लिए समर्पित हैं जो इनके झूठे बहकावे में फँस जाते हैं। सभी सामान्य जनता अपना मताधिकार सोच समझ कर सही व्यक्ति को ही दें अन्यथा फर्जी व्यक्ति सत्ता पर काबिज होकर देश को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।

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