आरे पर हो रहा है राजकीय घमासान

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आरे पर हो रहा है राजकीय घमासान …

 रॉयल पाल्म , फ़िल्म सिटी को लेकर सोशल मीडिया पर आंदोलनकारियों पर उठ रहे सवाल

#Shutdown film city ट्विटर पर हो रही है ट्रेंड

मुंबई हाई कोर्ट के आरे पर निर्णय आते ही पेड़ काटने की प्रक्रिया शुरू हुई। आंदोलनकारियों की भीड़ को देखते हुए क्षेत्र में धारा 144 लगाई गई। इस निर्णय को जहाँ सरकार को कोसा जा रहा है और फासीवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ कुछ सोशल मीडिया का वर्ग अब आंदोलनकारियों के सेलेक्टिव आउटरेज़ को निशाना बना रहा है।

सवाल 1 :

सोशल मीडिया पर लोगों का सवाल है कि जो लोग आरे का विरोध कर रहे हैं यह सभी लोग ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो वातानुकूलित गाड़ियों में और घरों में रहते हैं। जिनका मेट्रो से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं। इसमें ज्यादातर वह लोग हैं जो अपनी गाड़ियों से सफर करते हैं और कुछ तो फ़िल्म सेलिब्रिटीज है।

सवाल 2:

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है की मेट्रो आना बेहद जरूरी है क्योंकि इसमें आम जनता को काफी लाभ होने वाला है जो ट्रेनों में लटक लटक कर अपना सफर तय करते हैं। लोगों का यह भी मानना है कि सिर्फ मेट्रो कार शेड के लिए ऐसा उग्र आंदोलन आखिर क्यों?

सवाल :3

रॉयल पाल्म , फ़िल्म सिटी जैसे कई एकड़ में फैले इमारतों पर आखिर आंदोलनकारी सवाल क्यों नहीं खड़ा करते हैं? सिर्फ मेट्रो कार शेड पर ही आंदोलन क्यों ?

सवाल 4:

लोगों का मानना है कि मेट्रो का विरोध करना यह आम जनता का विरोध के बराबर है। जितना महत्व पर्यावरण का है उतना महत्व हर साल ट्रेन से गिरकर कटकर मरने वालों का भी है। पेड़ तो फिर भी लगाए जा सकते हैं मगर हर साल जाने वाले हजारों जिंदगियां और ट्रेन एक्सीडेंट से बर्बाद होने वाले परिवार को मेट्रो के रूप में ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कई लोग इस पूरे आंदोलन को सरकार को घेरने वाला प्रोपोगंडा भी बता रहे हैं। एक न्यूज़ रिपोर्ट अनुसार, 23,716 इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स ने कई हेक्टर जंगल महज 30 वर्षों में साफ किए गए। 99.8% प्रोजेक्ट्स को फॉरेस्ट से क्लीयरेंस प्राप्त हुआ है। ऐसे वक्त में जब इतने जंगल हटाये गए तब यह ngos कहाँ लुप्त हो गयी थी? ऐसे कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर उठ रहे हैं कुछ सरकार का समर्थन कर रहे हैं तोह कुछ विरोध ..

आइये देखते हैं सोशल मीडिया के कुछ ट्वीट्स और सवाल ..