ऐसे दो स्तंभ जो इस्लाम को विश्व का सबसे शक्तिशाली मजहब बनाता है..

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ऐसे दो स्तंभ जो इस्लाम को विश्व का सबसे शक्तिशाली मजहब बनाता है..

आज पूरे विश्व में ईसाई धर्म के बाद सबसे ज्यादा बोल बाला जिसका है वह धर्म है इस्लाम। इस्लाम ईसाइयों के बाद पूरे विश्व में प्रभावशाली धर्म है। इस्लाम की अर्थव्यवस्था ही उसके प्रभावशाली होने का प्रमुख कारण भी हैं। इस्लाम की अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख ढांचे हैं हलाल और जकात। यह दोनों के कारण आज विश्व में इस्लाम ने सबसे मजबूत पैठ बनाई हुई है। विश्वविख्यात भारतीय अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य का भी यही मानना है।” धर्मस्य मूलम अर्थम” अर्थात धर्म का मूल आधार ही अर्थ है। यानी जिस धर्म की अर्थव्यवस्था सक्षम होती है वहीं विश्व पर राज्य करता है।

जकात:

हर मुसलमान को साल में एक बार अपने आय का 2.5% हिस्सा जगत के रूप में अपने मस्जिदों में या मुसलमानों को देना होता है। इसे 2.5% राशि से अलग अलग कामों में लगाए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सालाना करोड़ो की राशि उपलब्ध होती हैं। यह राशि यतीम बच्चे, विधवा औरतें, और भी अन्य धार्मिक कामों में लगाई जाती है। मिली गैजेट नामक वेबसाइट पर यह बताया गया है की सालाना ₹2,00,00,000 उन मुसलमानों पर खर्च किए जाते हैं जो आतंकवाद के झूठे मामलों में फसाए गए हो। मात्र में अगर सही मायने में मुसलमान 2.5% का जकात दे तो सालाना 7500 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था होगी। यह एक कारण है जो इस्लाम को सबसे मजबूत धर्म बनाता है।

हलाल:

हलाल इंडस्ट्री भी भारत में उभरते हुए मार्केट के रूप में देखा जाता है। हर मुसलमान हलाल प्रोडक्ट को प्राथमिकता देता है। इस कारण हलाल प्रोडक्ट पर मुसलमान ज्यादा निर्भर होते हैं। कोई भी प्रोडक्ट में हराम इनग्रेडिएंट्स होने की वजह से मुसलमान हलाल प्रोडक्ट्स को ही ज्यादा तवज्जो देते हैं। हर प्रोडक्ट को हलाल सर्टिफिकेशन करवाना पड़ता है। और हर प्रोडक्ट को उस सर्टिफिकेशन की कुछ फीस चुकानी पड़ती है। अगर वह प्रोडक्ट हलाल सर्टिफाइड ना हो तो मुसलमान कुछ प्रोडक्ट को खरीदने में आनाकानी करेंगे। इस कारण से बड़े-बड़े कंपनियां 25 करोड़ उपभोक्ताओं को नाराज नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें उनके प्रोडक्ट के बहिष्कार होने का डर रहता है। इसीलिए हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को हलाल सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया  को  पूर्ण कर लेती है। इस्लामिक संस्था इस प्रोडक्ट को जांचने के बाद ही हलाल सर्टिफिकेट देती है। इस फीस से इस्लामिक संस्थाएं बहुत समृद्ध होती है साथ साथ हलाल चीजें भी मुस्लिम समुदायों तक पहुंचाई जाती है। ऐसा कहा गया है कि 2050 तक भारत हलाल इंडस्ट्री के रूप में उभर कर आएगी। सबसे पहले हलाल मीट की पहल हुई थी मगर अब हां सिर्फ मीट तक सीमित ना रहते हुए हलाल पर्सनल केयर, हलाल फूड, हलाल कॉस्मेटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स, हलाल फ्लाइट, हलाल होटल्स, हलाल बेवरेजेस के रूप में यह इंडस्ट्री का विस्तार हो चुका है।
आने वाले वर्षों में वैश्विक हलाल मार्केट 9.7 ट्रिलियन यूएस डॉलर तक होने की आशंका जताई गई है। यह भी एक दूसरा कारण है जो इस्लाम को सबसे शक्तिशाली धर्म बनाता है।
वैसे हलाल विषयो में कई यूरोपीय  देशों में विरोध भी जताया जा रहा है। श्रीलंका में तो इसपर बैन की मांग हुई थी।