भारत में राजकीय हत्याएं (Political Assassination) चरम सीमा पर..

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भारत में राजकीय हत्याएं चरम सीमा पर..

बढ़ रही है असहिष्णुता ..

पोलिटिकल एसासिनेशन पर बने नया कानून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता पर विराजमान होने के पश्चात कई लोगों को यह मैंडेट हजम होते नहीं दिख रहा है। ऐसा इसलिए आए दिन बीजेपी कार्यकर्ता, आरएसएस कार्यकर्ता, गौ रक्षक ,हिंदू कार्यकर्ता यह सभी विरोधको के रडार पर है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या और उनके साथ होनी वाली हिंसा आए दिन होते ही रहते हैं। मगर अब यह हिंसा वाली आग पूरे देश भर में व्यापक रूप से फैलती दिख रही है।

एक हफ्तों में 4 वारदातें

पहली वारदात : आदित्य गवळी को भाजपा का प्रचार करने की वजह से गांधी मैदान पर रात 11:00 बजे पीटा गया। यह घटना अहमदनगर की है।

स्रोत: लोकमत ,रविवार 26 मई

दूसरी वारदात : बीजेपी अल्पसंख्यक के अध्यक्ष मतीन पटेल की अकोला में हत्या की गई। इस घटना में बीजेपी कार्यकर्ता मुमताज पटेल भी घायल बताया जा रहा है। देश के हारे उम्मीदवार हिदायत पटेल उनके साथियों पर हत्या करने का मामला दर्ज हुआ है।

स्रोत: 26 मई 2019 ,मुंबई चौफेर

तीसरी वारदात: स्मृति ईरानी के सबसे करीबी माने जाने वाले सुरेंद्र सिंह पर अज्ञात लोगों द्वारा हत्या करने की घटना सामने आई है

चौथी वारदात: पश्चिम बंगाल के संतों घोष नामक बीजेपी कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या की गई। यह घटना चकदाह में शुक्रवार को हुई।

कैसे होगा इन समस्याओं का निवारण ?

1) ऊपर दिए सभी वारदातों में उन सभी लोगों की हत्या हुई है जिन्होंने बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए सहयोग किया है।

2) सत्ता में लाने के कारण उन सभी को या तो पीटा गया है या मौत के घाट उतारा गया है।

3) यह सभी हत्याएं को पॉलीटिकल एसासिनेशन भी कहा जाता है।

4) यह हत्या करने की मुख्य वजह है की उन सभी लोगों में डर बैठाना जो बीजेपी को सहयोग करेंगे या वोट करेंगे। ऐसी हत्या करने का मकसद है की पूरे देश मे भय का माहौल बनाना।

5) ऐसी दहशत निर्माण करके बीजेपी को सत्ता से आसानी से नीचे उतारा जा सकता है।

6) मौजूदा सरकार को पॉलीटिकल एसासिनेशन पर मृत्युदंड की सजा घोषित कर देनी चाहिए और इन सभी मामलों की जाँच, एनआईए को सौंपी जानी चाहिए ।