भिवंडी में बन रही सड़कें दुनिया का आठवाँ अजूबा

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भिवंडी में बन रही सड़कें दुनिया का आठवाँ अजूबा

भिवंडी के कल्याण रोड की आधी सड़क कंक्रीट की और आधी सड़क पेवर ब्लॉक की।

भिवंडी: भिवंडी की जनता लगभग पिछले 15 वर्षों से अच्छी सड़क के लिये तरस रही है। यहाँ पर कई साल से नयी सड़क बनाने का काम नही हुआ। जो भी हुआ वह केवल कागजों पर लीपा पोती हुई जमीन पर केवल सड़को में गढ्ढे ही गड्ढे थे और हैं। वर्षों से खराब सड़क का दंश झेल रही जनता ने जब आवाज़ बुलंद की तो पिछले 3 वर्षों में फ्लाईओवर और सड़क का काम शुरू हुआ, लेकिन काम निरंतर बंद और चालू होता रहा। एक स्थानीय नागरिक ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर हमें बताया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई जनप्रतिनिधियों ने अपना हिस्सा ना मिलने पर समय समय पर सड़क और फ्लाईओवर के निर्माण में बाधा डाली और निर्माण कार्य में देरी की। देरी इतनी हुई कि एक से डेढ़ वर्षों में पूरा होनेवाला काम 3 वर्षों में भी पूरा नही हो पाया।
भिवंडी में सड़कों को लेकर आंदोलन हुये तो आनन फानन में महापौर, विधायक और सांसद ने 55 सड़कों को कंक्रीट सड़क बनाने की मंजूरी मिल चुकी है इसका प्रचार किया और गाजे बाजे के साथ नारियल फोड़े गये। उधर शिवसेना जो अपने सहयोगी सत्ताधारी बीजेपी से नाराज़ चल रही थी उसने उन्ही सड़कों का फिर से उद्घाटन किया।
इतने उद्घाटन होने के बाद जनता को भरोसा हो गया कि, अब नई कंक्रीट सड़क बनने के बाद उनकी तकलीफें कम हो जायेंगी लेकिन, अब जो हो रहा है ठीक उसका उल्टा हो रहा है। कल्याण नाका से लेकर भिवंडी नाशिक बायपास तक कि जो सड़कें है वो आधी कंक्रीट की बनाई जा रही हैं और आधे पर पेवर ब्लॉक की सड़कें बनाई जा रही हैं। इस मामले में नागरिकों का कहना है कि आधी सड़क पर पेवर ब्लॉक लगाने से दोपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की सम्भावनायें बढ़ जायेंगी क्योंकि कंक्रीट और पेवर ब्लॉक के दोनों हिस्से ऊपर नीचे है समतल नही हैं। दूसरी बात पहले भी सड़को पर पेवर बालक लगे है लेकिन आज उनकी हालत खस्ता है। भारी भरकम वहां चलने पर ये सारे पेवर ब्लॉक्स टूट जायेंगे।

पुराने पेवर ब्लॉक जो सड़कों पर लगाये गए थे टूट गए हैं उनकी हालत खस्ता है।

जब हमने इस बारे में सड़क का काम काज देख रहे सुपरवाइजर से बात की तो उसने बताया कि पेवर ब्लॉक्स इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि इस सड़क के नीचे से सीवर लाइन डाली जानेवाली इसलिये आधी सड़के पेवर ब्लॉक्स की बनाई जा रही है। ऐसा इसलिये जब भी सीवर लाइन डालने की आवश्यकता हो तो ब्लॉक्स हटाकर सीवर लाइन डाली जा सकती है।

भिवंडी में मनाही होने के बावजूद बड़े बड़े ट्रक और कंटेनर चलते हैं और ये पेवर ब्लोवक्स टूटकर भूसा हो जाते हैं।

फिर हमने पूछा अगर कोई भी संस्था काम करेगी तो पहले सीवर लाइन बनाएगी और उसके बाद सड़क और फ्लाईओवर तो जवाब मिला कि जिस कंपनी को सड़क और फ्लाईओवर का ठेका मिला है उन्होंने भिवंडी महानगरपालिका के सामने पहले सीवर लाइन बनाने के लिये आग्रह किया था लेकिन, महापौर और आयुक्त ने पैसे ना होने का कारण देकर काम नहीं किया अंततः ठेका लेनेवाली कंपनी ने पेवर ब्लॉक्स लगाकर निर्माण कार्य पूरा करने का निर्णय लिया।
आपको बता दें कि, भिवंडी महानगरपालिका में पैसा ना होने का कारण माहपौर और आयुक्त यह देते रहे हैं कि लोग टैक्स नही भरते। लोग अपना कई वर्षों से बाकी टैक्स समय पर भरे और इसके लिए बाकायदा तीन तीन बार अभय योजना चलाई गई पर इसका कोई फायदा नही हुआ।
भिवंंडी महानगरपालिका के एक कर्मचारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने के शर्त पर बताया कि भिवंंडी शहर में लगभग 85% से 87% लोग अपना महानगरपालिका टैक्स नही भरते जिसकी वजह से भी महानगरपालिका द्वारा किया जानेवाला विकास कार्य यहाँ कई वर्षों से रुका है, क्योंकि जनता बड़े पैमााने पर  सारी  सुविधायें बिना टैक्स भरे लेना चाहती है।

मुम्बई उच्चन्यायालय के आदेश के अनुसार मुख्य सड़कों पर पेवर ब्लॉक लगाने पर मनाही है। पेवर ब्लॉक केवल फुटपाथ पर लगाने के लिये इस्तेमाल हो सकते हैं।

भिवंडी की जनता का कहना है कि जो सड़क भिवंडी में बनाई जा रही है जिसमे आधा भाग कंक्रीट का और आधा भाग पेवर ब्लॉक से बना है वह बिना सोचे समझे किया गया काम है और यह भिवंडी की सड़क दुनियाँ में आठवें अजूबे के तौर पर दर्ज होगी।

 

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