एजुकेशन माफिया और पेपर लीक ठगों का गठबंधन

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एजुकेशन माफिया और पेपर लीक ठगों का गठबंधन

एजुकेशन माफिया और पेपर लीक ठगों का गठबंधन

कौन कहता है कि क्राइम सिर्फ अनपढ़ गंवार करते है ? आजकल पढ़े लिखे लोग भी क्राइम करने की होड़ में कैसे पीछे रह सकते है?

देश भर में पेपर लीक की घटना अब आम बात हो चुकी है। हाल ही में भिवंडी में भी इस घटना को लेकर 3 गिरफ्तारियां हो चुकी है। इसमें कुछ स्कूल और कोचिंग क्लासेस से जुड़े हुए लोग थे। यह घटना अपने आप मे देश के लिए बहुत बड़ी दुविधा का विषय है।इस घटना पर लगाम लगाने की कोई कोशिश सफल नहीं हो पा रही है। गिरफ्तारियों का भय भी नहीं रहा किसी को।
ऐसे पेपर लीक से देश को जो युवा प्राप्त होंगे क्या वह सचमुच क्वालिटेटिव होंगे ? बिल्कुल नहीं ..

मोटी रकम भरकर पालक वर्ग अपने बच्चो को बड़े बड़े फीस वाले कोचिंग क्लासेस में दाखिला दिलाते है। यह मोटी रकम के पिछे क्या कारण होता है यह कुछ पालक समझते हुए भी समझना नहीं चाहते। पेपर लीक तो बिना धनराशि के दर्शन होना मुश्किल है। कोचिंग क्लासेस इसी बड़ी राशि का कुछ परसेंटेज पेपर लीक करने वाले ठगों को पहुंचाते हैं और फिर क्या कोचिंग क्लासेस वालो की किस्मत खुल गयी और ढेर सारा माल अंदर..!कोचिंग क्लास वाले भी खुश और बड़े घर के पालक भी। पर गरीब बच्चो का क्या ?

बड़ी राशि भरकर पैसेवाले और समृद्ध परिवार तो अपने बच्चों को दाखिला दिला देते हैं मगर उन बच्चों का क्या जिनके पास इतने पैसे न हो..?

ऐसे बच्चे छोटे मोटे होम ट्यूशन में दाखिला लेकर कैसे कैसे पास हो जाते हैं। मगर एक बात तो निश्चित है बड़े कोचिंग क्लासेस में दाखिला पाए बच्चे चाहे वह बुद्धिमान हो या न हो डिस्टिंक्शन तो उनकी पक्की है।

यह माफिया वर्ग अगर इसी प्रकार चलता रहा तो यकीन मानिए भारत को अपने किस्मत पर रोने के अलावा और दूसरा कोई रास्ता नहीं होगा। गरीब बच्चों के लिए यह बहुत बड़ा अन्याय होगा। गरीब परिवार में पैदा हुआ गरीब विद्यार्थी कम अंक के कारण हर जगह पीछड जाएगा। सही मार्ग न मिलने पर वही विद्यार्थी गलत मार्ग अपनाकर पूरे समाज के लिए वह मुश्किलें खड़ी करेगा। कैसे रोका जाए यह एजुकेशन कार्टेल ?

उपाय :

1) शिक्षा विभाग को स्कूल द्वारा पेपर बनाने का अधिकार छीन लेना चाहिए ।

2) स्कूल के प्रश्न पत्रिका शिक्षा विभाग द्वारा बनाये जाए ।

3) इससे स्कूल के शिक्षकों के खुद के ट्यूशन पर लगाम लगेगी और परीक्षा में आनेवाले प्रश्न पत्रिका बच्चो को नहीं मिलेगी ।

4) सभी स्कूल में प्रश्नपत्रिका मेल द्वारा दी जाए।

5) यह मेल बच्चे स्कूल में और कक्षा में पहुंचने बाद दिए जाने चाहिए ।

6) सभी प्रश्पत्रिका के प्रश्न अलग अलग उच्च शिक्षित शिक्षकों द्वारा ही बनाए जाएं और वह सभी शिक्षकों को बच्चे स्कूल में बैठने के बाद ही मेल करनी चाहिए ।

7) इस तरीके से प्रश्नपत्रिका बच्चो तक पहुंचने का कनेक्शन ही समाप्त होगा ।

8) सभी प्रश्पत्रिका लीक प्रूफ होंगी ।

सजा कैसी होनी चाहिए?

इन पेपर लीक मामलों में काफी गिरफ्तारीयाँ हुई है मगर उसके बावजूद कानून का भय नहीं होने से यह मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों पर शिक्षकों पर या कोचिंग क्लास पर मकोका के अंतर्गत धाराएं लगा देनी चाहिए। यह माफिया भी कोई एक व्यक्ति नहीं चलाता बल्कि इसे चलाने पूरी टीम होती है। इसलिए मकोका की धाराएं लगानी बेहद जरूरी है ।