फ्रीडम ऑफ रिलिजन से विश्वशांति पड़ सकती है खतरे में

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फ्रीडम ऑफ रिलिजन से विश्वशांति पड़ सकती है खतरे में

धर्म से अगर विश्वशांति की बात होती है तो धर्म ही तीसरे महायुद्ध का कारण बन सकता है।

कुछ खबरों का अंश इस लेख में डाला है। वैसे इसी तरह की अनगिनत खबरें हैं जिसे डालना मैं उचित नहीं समझता है।
अब आते हैं मुख्य विषय पर Freedom of Religion को पूरे विश्व पटल पर अलग मान्यता है। संयुक्त राष्ट्र में भी इसकी अलग महत्व है। मगर यह Freedom of Religion ही तीसरे महायुद्ध का कारण बन सकता है। कैसे आईए जानते हैं।

19 जुलाई 2014 के अल जजीरा के एक आर्टिकल में कुछ आतंकियों ने ईसाइयों को इस्लाम अपनाने की धमकी दी थी।

ठीक उसी तरह 5 फरवरी 2015 www.ucanews.com में एक आर्टिकल छपा था जिसमे यह लिखा था कि इस्लामी मेजोरिटी देश बांग्लादेश में क्रिस्चियन मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण पर चिंता जताई गई थी।
मैंने यहाँ सिर्फ 2 न्यूज़ का हवाला दिया है। ऐसी न्यूज़ हर दिन हर देशों से देखने और सुनने मिल सकती है।

यह छोटी छोटी हिंसा एक दिन विकराल रूप धारण कर सकती है। Freedom of Religion को आगे करके हर देश मे कुछ धर्म उपदेशक जाते है और प्रचार करते करते कुछ लोगों को इन्फ्लुएंस कर उस देश के लोगों को धर्मांतरित करते हैं। ठीक दूसरी तरफ उस देश के धार्मिक संघटन इस घटना से काफी गुस्से में होते है और फिर यही गुस्सा का रूप दंगों में होता है।

न्यूजीलैंड की क्राइस्ट चर्च की घटना एक ताजा उदाहरण है। हर देश में एक मेजोरिटी धर्म का तबका होता है जो अपने देश के नागरिकों के धर्मांतरण पर आपत्ति जताते है।

Freedom of Religion पर अगर जल्द प्रतिबंध नहीं लगता तो भविष्य में स्थिति भयंकर होकर यह छोटी छोटी लड़ाई पहले तो दंगे फसादों में तब्दील होगी फिर धीरे धीरे यह लड़ाई दो देशों में होगी।
प्रतिबंध लगाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि हर देश अपना प्राचीन कालीन धर्म का अस्तित्व होता है। जो हर उस धर्म के अनुयायियों को सही जीने का तरीका सिखाता है।फिर Freedom of Religion के अंतर्गत उन्हें उस नए धर्म उपदेशकों की बातों को सुनने का लॉजिक समझ के बाहर है। यह लॉजिक से सिर्फ एक बात ही सामने आती है वह है वैश्विक हिंसा। इसका एक मात्र कारण है My Religion is good than your religion.

उपाय:

सभी देशों को एक संयुक्त रेसोलुशन पास करना होगा जो जिस धर्म में जन्म लेगा वह उसी धर्म का अनुयायी मरते दम तक उसी धर्म मे रहेगा। क्योंकि अगर यह रेसोलुशन पारित नहीं होगा तो विश्वशांति पर हिंसा के बादल छाए रहेंगे। और यह हिंसा तीसरे विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण बनेगा। फिर उसके बाद न तो धर्म रहेगा नाही धर्म उपदेशक और नाही अनुयायी रहेंगे।

ब्लॉग : By Anonymous