हेट स्पीच मॉब लीनचिंग की जननी

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हेट स्पीच मॉब लीनचिंग की जननी

कब लगेगी हेट स्पीच (Hate speech)पर रोक

भड़काऊ भाषणों से देश में बिघड रहा है माहौल

आज देश मे हेट स्पीच के किस्से आए दिन देखने मिल रहे हैं।व्हाट्सएप्प के द्वारा असामाजिक तत्वों ने पहले ही माहौल खराब किया ।अब टिकटोक(Tik-Tok) जैसे प्लेटफार्म का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है। जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए होता था अब वह बिल्कुल न रहा।

हेट स्पीच से ही मॉब लीनचिंग(Mob-lynching)को काफी बढ़ावा मिलता है। ऐसे वक्तव्य में सिर्फ हेट ही नहीं बल्कि गाली गलौच और अभद्र भाषाओं का प्रयोग भी किया जाता है।कैसे हेट स्पीच ने बिगाड़ा है देश का माहौल

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म (Social media Platform)पर कुछ असामाजिक तत्व सस्ते पब्लिसिटी स्टंट के लिए और अराजकता फैलाने के लिए गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।यह वीडियोस लाखो लोगो द्वारा देखा जाता है।ऐसे वीडियोस से लोग तुरंत हरकत में आते हैं।इस हेट नैरेटिव से इंसान के मष्तिष्क पर अप्रत्यक्ष रूप से तुरंत नकारात्मक प्रभाव डाला जाता है। इसका परिणाम यह होता है जो वीडियो देखता है उसमें नफरत के भाव पैदा हो जाते हैं और वह हिंसा के लिए तैयार हो जाता है। फिर हिंदू समुदाय को टारगेट करने हेतु हर छोटी छोटी बातों पर बड़ा विवाद किया जाता है। कभी कभी यह छोटी वारदाते साम्प्रदायिक तनाव और अराजकता भी बढ़ाने का कार्य करती है। कुछ बड़ी वारदाते देश मे देखने मिली है। ध्रुव त्यागी, विष्णु गोस्वामी, राकेश पवार ,चेतन शर्मा जैसे वारदाते जिसे कभी मेन स्ट्रीम मीडिया उठाने से भी कतराती है मगर दूसरी तरफ तबरेज अंसारी जैसे मामले अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बन जाती है। यह सभी वारदाते की जड़े भी हेट स्पीच ही है।

 

आपको बता दें , कुछ वर्षों पहले एक हिन्दू नेता कमलेश तिवारी पर ऐसे ही एक मामले में केस की गई थी।जिसमे उनपर रासुका जैसे संगीन धाराएं भी लगाई गई थी।
ठीक उसी तरह हिन्दू राष्ट्र सेना के धनंजय देसाई को भी मोहसिन शेख हत्या में कई साल जेल में बिताने पड़े थे क्योंकि धनंजय देसाई पर हेट स्पीच का आरोप लगा था।
मगर सवाल उठता है आखिर इन हेट स्पीच पर कारवाही के लिए देश मे कोई सरकार ,एजेंसीज ,कोर्ट ,संज्ञान आखिर क्यों नहीं लेता ??

क्या कानून सिर्फ बहुसंख्यकों के लिए है ?