जिन नेताओं को लगता है की मीडिया क्राइम को धार्मिक एंगल दे रही है क्या वह यह 4 पॉइंट प्रोग्राम लागू कर सकता है?

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जिन नेताओं को लगता है की मीडिया क्राइम को धार्मिक एंगल दे रही है क्या वह यह 4 पॉइंट प्रोग्राम लागू कर सकता है?

एम आय एम चीफ अस्ससुद्दीन ओवैसी ने मीडिया पर सवाल उठाया की मीडिया सिर्फ मुस्लिम क्राइम्स को हाईलाइट करके मुस्लिम समुदाय को बदनाम कर रही है।

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार क्राइम में सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय शामिल है मगर इस रिपोर्ट में सिख, जैन और ईसाई समुदाय दूर दूर तक नहीं है।हिंदू बहुसंख्यक होने के बावजूद क्राइम स्टेटिस्टिक्स में काफी पीछे है।

वैसे यह बात खुद मुस्लिमो के सभी धार्मिक संघटनो को सोचनी चाहिए नाकि मीडिया को। क्राइम क्राइम होता है उसमें धर्म के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। मगर यह बात बिल्कुल सत्य है कि क्राइम में कोई धर्म का व्यक्ति लिप्त होने से उसका धर्म अप्रत्यक्ष रूप से बदनाम जरूर होता है। ठीक उसी तरह जिस तरह एक गलत बेटा पूरे परिवार की नाक कटा देता है।

 

क्या करना होगा धार्मिक संघटनो को ?

1) जब भी कोई धर्म का व्यक्ति किसी क्राइम में पकड़ा जाता है तो सभी उस धर्म के अनुयायियों को उसका समर्थन करना बंद कर देना चाहिए। उसे किसी प्रकार की आर्थिक, राजनैतिक , एवं कानूनी मदद न करें।

2) अगर वह व्यक्ति संविधान के खिलाफ कोई भी कार्य करता है तो उससे सभी संबंध तोड़ देने चाहिए।

3) अगर कोई धर्म का व्यक्ति कोई भी क्राइम करता है तो उसपर सबसे पहले कानूनी कारवाही उसी धर्म के धार्मिक संघटनो को करनी चाहिए।

4) उन सभी ngo को बंद करे जो उस आरोपी को मदद करती है क्योंकि यही ngo मानवाधिकारों को लेकर उन आरोपियों का समय समय पर बचाव करती है।

इसप्रकार अगर हर धर्म यह तरीका अपनाए तो कभी भी उस मीडिया को बदनामी करने का मौका नहीं मिलेगा। क्योंकि यह मीडिया के लिए चिंतन का विषय न होकर धार्मिक संघटनो के लिए चिंतन का विषय होना चाहिए।

 

 

Blog :By Anonymous