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खुल गया नोटा बटन दबाने का सीक्रेट

नोटा ने बढ़ाई सभी राजकीय पार्टियों की चिंता

ठाणे में 75180 लोगों ने दबाया नोटा

एक न्यूज़ रिपोर्ट अनुसार , ठाणे जिला के 18 विधानसभा मतदार संघ से कुल 212 उम्मीदवारों को 63 लाख 92 हजार 395 वोट मिले हैं। 75180 मतदाताओं ने नोटा दबाकर अपनी नापसंदी जाहिर की है। जब हमने कई मतदाताओं से इलेक्शन पूर्व चर्चा की थी तब ऐसी जानकारी प्राप्त हुई । लोगो का मानना है जीते तो कोई भी मगर कोई काम नहीं करने वाला।जो समस्या 10 साल पहले थी वह समस्या अब और बढ़ चुकी हैं। लोगों का मानना है।

नोटा कारण 1)

नेताओं का अपने कार्यालय में नदारद रहना ,राजकीय नेता कि लोगो के प्रति उदासीनता लोगों को नोटा दबाने हेतु मजबूर करती है। लोगों की समस्या को लेकर कई नेता अपने कार्यालय से नदारद रहते हैं। इन सभी कारणों से लोगों ने नोटा का बटन दबाकर अपना संदेश स्पष्ट रूप से दिखा दिया है।

नोटा कारण 2)

इस विषय में जब हमने कुछ पढ़े-लिखे वर्गों से चर्चा की उनका मानना है कि कई नेता अपने प्रोजेक्ट और टेंडर्स में फँसे रहते हैं जिससे वह नेता लोगों की समस्या को समझने में पूरी तरह विफल रहता है। लोगों का मानना है की लोकप्रतिनिधि को समाज की सेवा करनी के लिए ऐसे प्रतिनिधियों को सरकार काम करने के लिए वेतन देती है फिर ऐसे वक्त में लोकप्रतिनिधि अपने प्रोजेक्ट और टेंडर कैसे चलाते है ? ऐसे लोकप्रतिनिधि प्रोजेक्ट के चक्कर मे लोगो की सेवा कैसे कर सकती है?

नोटा कारण 3)

तीसरी बात सामने आई की अब राजनीति में सिर्फ बड़े बड़े करोड़पति लोगो के लिए ही अखाड़ा बन चुकी है।आम जनता को राजनीति में या तो आने नहीं दिया जाता है या फिर पैसो की ताकत से धमकाकर डराकर या कुछ ब्लैकमेलिंग के आधार पर नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया जाता है।

नोटा कारण 4)

पूरा देश डिजिटल हो चुका है मगर स्थानीय नेता आज भी डिजिटल साधनों का प्रयोग नहीं करते। कुछ नेताओं को छोड़कर बाकी नेता फेसबुक ट्विटर व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से आज भी दूरी बनाए रखे हैं।आज लोग अपनी शिकायत को लेकर उन नेताओं के दफ्तरों में समय के अभाव के कारण चक्कर लगाना उचित नहीं समझते। ऐसे वक्त में लोकप्रतिनिधी को अबे सीधे जनता से संपर्क कर उनकी समस्याओं का निवारण करना चाहिए।

नोटा कारण 5)

लोगों का कहना है कि अगर आम जनता को राजनीति में आना हो तो इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को इस विषय को लेकर गंभीर होना चाहिए। ऐसे ही लोगों को टिकट देना चाहिए जिसकी प्रॉपर्टी 20 लाख के अंदर हो।ऐसे कदम से लोकतंत्र में पैसों का वजन और चलन बहुत हद तक कम होंगे। वोट की खरीद और बिक्री में पूरी तरह रोक लग सकती है। लोग पैसों के बलबूते नहीं बल्कि काम के बलबूते जीतकर आएंगे। एक आम जनता ही एक आम जनता का दर्द समझ सकते हैं क्योंकि लोकप्रतिनिधि एफिडेविट के अनुसार अधिकतर नेता के पास करोड़ो की संपत्ति का जिक्र ECI के पास है।