क्या वर्टिकल सिमिट्री बन सकती हैं नया पर्याय …?

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क्या वर्टिकल सिमिट्री बन सकती हैं नया पर्याय …?

 

क्या वर्टिकल सिमिट्री बन सकती हैं नया पर्याय …?

मुंबई : जिस हिसाब से भारत की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है उसके हिसाब से अब दफनाने हेतु भूमि की कमी भी महसूस होने लगी है! और जल्द ही आबादी पर नियंत्रण न लगाया गया तो परिस्थिति काफी भयंकर हो सकती हैं! हर संसाधन जैसे पानी बिजली या फिर जमीन दिनोदिन घटती जा रही है !
जमीन की कमी के वजह से आज आए दफन भूमि के लिए आंदोलन चलाए जाते हैं या फिर अनशन भी किए जाते हैं!
जमीन की कमी को देख कर ईसाई समाज के लोगों ने एशिया की सबसे बड़ी वर्टिकल सिमेट्री सेंट थॉमस नाम से तुगलकाबाद में बनाई है! यह दफन भूमि वर्टिकल सिमिट्रि के रूप में है!

आखिर क्या है वर्टिकल सिमेट्री?

यह सामान्य दफन भूमि से थोड़ी अलग होती है! यह दफन भूमि ऊंची इमारत के रूप में होती है! मंजिला पर कब्र के आकार का मिट्टी से भरा एक कृत्रिम कब्र बनाया जाता है जहां पर लाश को दफनाया जाता है ऐसे कई सैंकड़ों लाशें इस वर्टिकल सिमेट्री में दफनाए जाते हैं! यह प्रणाली से भूमि की कई समस्याएं हल हो सकती हैं! खासकर शहरों में जमीनों की किल्लत ज्यादा महसूस होती है! इसी को देखते हुए ईसाई समाज ने एक बहुत ही कारगर निवारण वर्टिकल सिमेट्री के रूप में ढूंढ निकाला है! यह वर्टिकल सिमेट्री कई देशों में भी देखा जाता है! अगर यह प्रणाली भारत में उपयोग में लाई जाए तो जमीन संबंधित काफी समस्याएं समाप्त हो सकती है!