क्यों अंतर धर्मीय विवाह पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए ?

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क्यों अंतर धर्मीय विवाह पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए ?

लगातार बढ़ रहे हैं हॉनर किलिंग के मामले 

प्रशासन भी इनपर लगाम कसने में उदासीन 

आज हमारे भारत के संविधान में अंतर धर्मीय शादियों के लिए विशेष प्रावधान रखा है। दो प्रेम करने वालों के लिए धर्म आड़े नहीं आना चाहिए। प्रेमी युगलों को अपनी जिंदगी किसके साथ बिताना है इस बात की उन्हें पूर्ण आजादी हमारे संविधान ने दे रखी है।
मगर यह अंतर धर्मीय विवाह कोई भी एंगल से कामयाब होते नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि अंतर धर्म में विवाह के ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां धर्म के ठेकेदार उन प्रेमी युगलों के लिए गले की हड्डी बन चुकी है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां अंतर धर्मी विवाह, धार्मिक हिंसा में तब्दील हुई है। कई मामलों में प्रेमी युगलों को मौत के घाट भी उतारा दिया गया है। इस मामले में प्रशासन की भी उदासीनता भी साफ दिखाई दे रही है।

पहला मामला

जब तीन तलाक की पीड़िता रेश्मा ने अपना विवाह दीपक राठौर उर्फ दीपू से जब कर लिए तब उन दोनों प्रेमी युगलों को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही है।

स्रोत 17 मई 2019 ब्रेकिंग ट्यूब.कॉम

दूसरा मामला

मुंब्रा से सटे डायघर गांव में विजय शंकर यादव ने जब सोफिया से विवाह किया तब से लड़की के परिवार वालों का शादी के लिए लगातार विरोध था। मगर उसके बावजूद दोनों ने अपना विवाह रचाया। सूफिया अब प्रैग्नैंट भी थी। मगर दोनों दांपत्य को उन्हीं के किसी जान पहचान वाले व्यक्ति ने गला रेत कर हत्या कर दी।

स्रोत: 19 सिंतबर 2016 मिड डे

तीसरा मामला

सियासत नामक न्यूज़ पोर्टल की खबर है। जिसमें एक मुस्लिम युवती हिंदू लड़के से शादी रचाती हैं। लड़की के घरवाले इस शादी के बिल्कुल खिला़फ थे। आरोप है कि लड़के ने उनकी लड़की से जबरदस्ती विवाह किया है। सियासत पोर्टल के अनुसार ऐसे मामले मुस्लिम समाज के लिए चिंताजनक बात है जो इस्लामी तालीम के खिलाफ हैं।

स्रोत : 1 मई 2019 सियासत

चौथा मामला

फरीदाबाद के संजय कुमार ने एक मुस्लिम लड़की से शादी की थी। मगर पारिवारिक विरोध के चलते दोनों ने डायवोर्स ले लिया था। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। लड़की के रिश्तेदारों ने संजय कुमार को मौत के घाट उतार दिया।

स्रोत अगस्त 23 2018 फर्स्ट पोस्ट

पांचवा मामला

मामला पश्चिम बंगाल के बर्दवान का है। जहां एक मुस्लिम युवती को पत्थरों से मारकर हत्या कर दी जाती है। इसकी वजह भी उस युवती का हिंदू लड़के से प्रेम करना था।

स्रोत 12 सितंबर 2018 न्यूज 18

छठा मामला

हिंदू लड़का एवं मुस्लिम लड़की द्वारा गुप्त रूप से विवाह रचाने की वजह से दोनों दंपतियों को मौत के घाट उतार दिया गया। यह हत्या दानिस्ता के भाई तालिब, आसिफ और तस्लीम ने की। उनके दोस्त आमिर और जफर भी इस वारदात में शामिल थे।

स्रोत 30 नवंबर 2014 टाइम्स ऑफ इंडिया

अंतर धर्मीय विवाह के मृतकों की और हिंसा की लिस्ट काफी लंबी है। ऊपर दिए गए सभी घटनाओं से एक बात का निष्कर्ष लगाया जा सकता है कि भले ही संविधान ने अंतर धर्मीय विवाह के लिए प्रावधान रखे हो मगर कोई भी धार्मिक संस्था चाहे वह किसी भी धर्म की हो , कोई भी समुदाय अंतर धर्मीय विवाहों के पक्षकार नहीं है। इन विवाहों से हर बार सिर्फ कानून सुव्यवस्था ही निर्माण हुई है। ऐसे परिस्थिति में ऐसे अंतर धर्मीय विवाहों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि प्रेम से बढ़कर महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून सुव्यवस्था होती है।

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