क्यों हर बार ऑर्डिनेंस (अध्यादेश ) की होती है मांग..?

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क्यों हर बार ऑर्डिनेंस (अध्यादेश ) की होती है मांग..?

क्यों हर बार ऑर्डिनेंस (अध्यादेश ) की होती है मांग..?

देश में एक बहुत ही अजीब किस्म की मांग देखने को मिलती है! ऑर्डिनेंस .ऑर्डिनेंस.. ऑर्डिनेंस जब भी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आता है तब बहुत बड़ी संख्या में जन समुदाय विरोध प्रदर्शन करता है! ऐसे कई मामले सामने आए हैं! जैसे जलीकट, शबरीमाला, एससी एसटी एक्ट! अब राम मंदिर निर्माण को लेकर भी ऑर्डिनेंस यानी अध्यादेश लाने की मांग हो रही है!

यह अध्यादेश का विषय एक बहुत ही गंभीर विषय हैं! जिसकी दखल हम सभी को लेनी चाहिए! यह विरोध हर बार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर ही होता है! अब इन विरोध से एक बात का अनुमान तो लगाया जा सकता है कि अब जनता कोर्ट के न्यायाधीशों के निर्णय एवं उनकी नियुक्ति पर काफी नाराज हैं! हर बार इंपिचमेंट का प्रस्ताव रखा जाता है! इन सभी कारणों से लोगों का न्यायाधीशों के प्रति एवं उनके निर्णयों के प्रति नाराजगी साफ झलकती हैं!

उपाय :

अगर न्यायपालिका को सही मायने में स्वतंत्र रूप में देखना है तो भारत को कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर जापान की रिटेंशन इलेक्शन की प्रणाली अपनानी होगी ।

कैसे होनी चाहिए जज की नियुक्ति ?

1) जब जनरल इलेक्शंस होते हैं तो जनता के सामने दो पर्याय देने चाहिए ।क्या आप मौजूदा न्यायपालिका के जज से संतुष्ट है ..? YES या NO ।ज्यादा वोटिंग जिस पक्ष में होगा वह जज नियुक्त किया जाना चाहिए ।

2) जो जनता जज की नियुक्ति करेगी वह साफ छवि (नॉन क्रिमिनल बैकग्राउंड )के होने चाहिए जिससे सही लोगों से सही व्यक्ति की नियुक्ति होगी ।

3) इस प्रणाली से किसी भी तरह की नेपोटिज्म (भाई भतीजावाद ) ,नेक्सस एवं लोबिन्ग जड़ से खत्म होगी क्योंकि जज की नियुक्ति सीधे जनता तय करेगी  ।

4) न्यायाधीश अपना निर्णय  स्वतंत्रता से ले सकेंगे और इंपिचमेंट जैसी लटकती तलवार हमेशा के लिए खत्म होगी।

5) इस प्रणाली से न्यायपालिका और भी ज्यादा स्वतंत्र एवं पारदर्शक होगी और जनता के हित में होगी ।

6) यह प्रणाली से डेमोक्रेसी कई वर्षों तक साफ सुथरी रहेगी क्योंकि न्याय व्यवस्था प्रजा के अधीन होगी ।