मुंब्रा में निकाली श्री दुर्गामाता यात्रा

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मुंब्रा में निकाली श्री दुर्गामाता यात्रा

विश्व् हिंदू परिषद के श्री आशिष कनोजिया और उनके सहयोगियों के माध्यम से, नवरात्रि में नौ दिन घटस्थापना से लेकर दशहरा तक इस पारंपरिक उपक्रम का आयोजन किया जाता है। श्री दुर्गामाता यात्रा पूरे हिंदू समाज में भगवान, देश और धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की जाती है।

इसी वर्ष इसी तरह के यात्रा का आयोजन मुंब्रा शहर में बजरंग दल के माध्यम से किया गया हैं। इस यात्रा की माध्यम से समाज मे धर्मजागृती कि जाती है। श्री दुर्गामाता यात्रा पिछले 25 से 30 वर्षों से पूरे महाराष्ट्र का एक अभिन्न हिस्सा हैं। युवाओं में राजनीति, समाजवाद और अर्थशास्त्र के अलावा देव, देश ओर धर्म के प्रति प्यार ओर निष्ठा उत्पन्न हो इसलीये ये दौड एक सामर्थ्य शाली उपक्रम है।

श्री शिव छत्रपति और धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज जैसे राष्ट्र, भगवान और धर्म के प्रति निष्ठा और त्याग की भावना लाने के लिए माँ तुलजाभवानी से प्रार्थना करते हैं।

माँ जीजामाता ने भारत माता की परेशान स्थिति का अनुभव किया था। हमारे हिंदुओं के धर्मस्थलों, तीर्थस्थलों ओर मंदिरों पर आने वाले इस विदेशी आक्रमणकारियों को उनकी आँखों से देखा था।
हिंदुस्तान में माताओं और बहनों की यातना देखी थी। माँ जीजामाता के गर्भ में “शिवनेरी किले” पर शिव छत्रपति के रूप में एक चिंगारी ने जन्म लिया वही चिंगारी आगे जागर एक आग बनी और सकल हिंदुस्तान का भाग्य उभरा।

ये चिंगारी जो जीजामाता के गर्भ से पैदा हुई वह नवरात्रि में मां तुलजाभवानी को मांगी हुई वरदान ओर प्रार्थना का फल था।

जीजामाता श्री तुलजाभवानी माता की अनन्य भक्त थीं। यह हमारी भावना है कि माता जीजामाता ने श्री तुलजाभवानी से हिंदुस्तान की स्थिति को बदलने और हिंदुओं के लिए अपना साम्राज्य स्थापित करने के लिए एक सामर्थ्यशाली पुत्र मुझे मिले ये वरदान देवीमाता से नवरात्रि में माँगा था।

शिव छत्रपति के रूप में जिस चिंगारी ने जन्म लिया वो इस नवरात्रि काल की माँग के कारण हुआ था।

शिव छत्रपति में जो ताकत, साहस, लडाकूपन, बुद्धिमत्ता, चातुर्य, धर्मनिष्ठा, राष्ट्रभक्ति और दुश्मन को मिट्टी में दफनाने की ताकत थी वो ताकत उनके भक्त, पाइक होने के नाते हमें भी ये वरदान मिले ये माँग हम तुलजाभवानी माता से नवरात्रि में “श्री दुर्गामाता यात्रा” के माध्यम से हर गाँव, बस्ती, शहर और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में माँगते हैं।

हर हिंदू ने अपने राष्ट्र, धर्म और माँ-बेहन के रक्षा के लिए इस “श्री दुर्गामाता यात्रा” में शामिल होना चाहिए। दशहरा के दिन ठाणे में दुर्गा माता भव्य दौड़ भी रखा गया और उसमें मुंब्रा के सभी सहभागी लोगो को सम्मानित भी किया गया।