नोटा के बदले बाजार में आया एक नया प्लान

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नोटा के बदले बाजार में आया एक नया प्लान

जी हाँ अब तक नोटा का इस्तेमाल मोदी विरोधको ने खूब आजमाया। सत्य यह भी है की कुछ स्टेट एलेक्शन्स में काम भी कर गया। मगर यह ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया। नोटा की पोलखोल आखिर हो ही गयी। इसलिए अब विरोधको ने एक नया पैंतरा अपनाया है। वह है मतदान पर पूर्ण रूप से बहिष्कार।

विरोधक अब भलीभांति जान चुके हैं की बीजेपी की बुराई करना उन्हें भारी पड़ सकता है इसलिए अब विरोधक ने मतदान का पूर्ण बहिष्कार का पैंतरा अपनाया है।
इस रणनीति के अंतर्गत जो क्षेत्र में बीजेपी के विधायक, नगरसेवक या मेंबर ऑफ पार्लियामेंट चुने जा चुके हैं। वहाँ लोगों की कुछ समस्याएं होती है। उस समस्या को अधिक व्यापक बनाकर एक असंतुष्टि का माहौल बनाया जाता है। फिर लोगों को यह बातों से कन्विंस किया जाता है कि अगर आपकी समस्या की सुनवाई नहीं होती है तोह इसबार मतदान का सामूहिक बहिष्कार करे। यह पैंतरा कई क्षेत्रों में देखा गया है। इसके देश भर में काफी उदाहरण देखने और सुनने को मिले है।

मतदान बहिष्कार की बातों को कन्विंस करके 2 चीजे प्राप्त होती है। पहला किसी पार्टी के एजेंट होने का टैग नहीं लगता और दूसरा बीजेपी का वोटबैंक आसानी से डगमगा जाएगा ।
ब्यूरोक्रेसी में अगर आपकी सुनवाई न हो इसीलिए केंद्र सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति है जहाँ आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।अगर नहीं तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाये। मतदान बहिष्कार का पैंतरा बिल्कुल गलत क्योंकि सरकार चाहे जो आए ब्यूरोक्रेसी वही रहेगी। इसलिए अपना मूल्यवान मत बिल्कुल सही जगह डाले चाहे जो सरकार हो। मगर मतदान बहिष्कार का पैंतरा देश को अंधकार में डालने जैसा है।

 

Blog:  By Anonymous