पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी पर मीडिया में कोहराम , सही या गलत ?

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पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी पर मीडिया में कोहराम ,सही या गलत ?

इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं।

पत्रकार की परिभाषा और पत्रकारिता का स्टैंडर्ड कुछ चंद पत्रकारों द्वारा कलंकित किया जाता है।यही वजह से आज लोग पत्रकारों से किनारा कर लेते हैं।

प्रशांत जगदीश कनौजिया नामक एक पत्रकार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अरेस्ट करने पर पूरे देश में कोहराम मचाया जा रहा है।आपको बता दें प्रशांत की पत्नी जगीशा अरोड़ा ने मीडिया में बताया की “उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें एक महिला ख़ुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी.”
इस वीडियो के साथ उन्होंने योगी का ज़िक्र करते हुए एक टिप्पणी की थी। प्रशांत कनौजिया स्वयं को ‘द वायर हिंदी ‘और ‘इंडियन एक्सप्रेस ‘का एक्स पत्रकार भी लिखता  है।

पत्रकारिता की ताकत उसके कलम में होती है। मगर इन पत्रकारों ने सारी पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। 3 सितंबर 2016 को उन्होंने एक विवादित ट्वीट किया था। उस ट्वीट में उन्होंने लिखा था “Kill saints and save Humanity”। वैसे तो यह ट्वीट काफी पुरानी है। मगर आज यह ट्वीट इस न्यूज़ पोर्टल के जरिए इसलिए सामने लाया गया है ताकि उनकी पत्रकारिता का चेहरा सबके सामने आ जाए। ऐसे विवादित बयानों से पत्रकारिता द्वारा क्रांति नहीं बल्कि यह खुलेआम खून खराबा की बातें कहकर प्रोत्साहन देने वाली है। क्या ऐसे पत्रकारों के लिए या उनके गिरफ्तारी पर आंसू बहाना उचित है? इससे पहले भी उनके कई ट्वीट्स में एन्टी हिंदू वाली भावनाएं देखने मिली थी ।आईए देखते हैं उनके कुछ विवादित ट्वीट्स।

 

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