भिवंडी में शहीदों को तिरंगा यात्रा द्वारा श्रद्धान्जलि…

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भिवंडी में शहीदों को तिरंगा यात्रा द्वारा श्रद्धान्जलि…


भिवंडी: रविवार 17 फरवरी 2019 को भिवंडी में भिवंडी मांगे जवाब टीम द्वारा पुलवामा में 14 फरवरी 2019, को एक फिदायीन आतंकी हमले में 45 सीआरपीएफ जवानों के शहीद हो जाने पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए “तिरंगा यात्रा” एवं “एक दिया शहीदों के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तिरंगा यात्रा में भिवंडी टाउन, शांति नगर, निजामपुरा, एसीपी ऑफिस और ट्रैफिक पुलिस द्वरा अमूल्य सहयोग किया गया। सभी पुलिस अधिकारियों ने तिरंगा यात्रा की सुरक्षा और यातायात का खासा ध्यान रखा। सलूट और दिए जलाकर शहीदों को सलामी भी दी।

तिरंगा यात्रा में भिवंडी शहर के आम भिवंडीकर ने हिस्सा लिया। आम भिवंडीकर के अलावा स्काउट, दाऊदी बोहरा कम्युनिटी, छोटे बच्चों इत्यादि ने मिलजुल कर दोनों कार्यक्रमों को सफल बनाया
तिरंगा यात्रा भिवंडी शहर के कमला होटल से शुरू होकर हुतात्मा स्मारक पर समाप्त हुई। उसके बाद स्काउट द्वारा वाद्य के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और भारतीय ध्वज को सलामी दी गई। तत्पश्चात वीरों को दीए जलाकर ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
तिरंगा यात्रा के दौरान और दीप प्रज्वलन के साथ साथ मेमोरेंडम भी साइन किया गया। इस मेमोरेंडम में सरकार से मांग की गई है कि, पैरामिलिट्री फोर्स को भी मेनफोर्स जितनी सुविधाएं मिले, पेंशन मिले और दोनों को संवेदनशील क्षेत्रों में गोली चलाने, स्वयं की सुरक्षा करने का एक जैसा अधिकार दिया जाए।

तिरंगा यात्रा के आयोजन में भिवंडी माँगे जवाब टीम से मयूर शाह, आशीष त्रिवेदी, राफीज़मीर, प्रशांत मिश्रा, गोविंद शर्मा, मुहम्मद सलीम, रवि यादव, चेतन प्रकाश नाईक और बोहरा मुस्लिम समुदाय से सुहैल रेशमवाला मुख्य आयोजक रहे। विदित हो कि राफीज़मीर जी ऑटो रिक्शा चालक है और वह अपने व्यवसाय की चिंता किये बिना दो दिनों तक इस तिरंगा यात्रा को सफल बनाने के लिये प्रयत्नरत रहे। अमूमन हमेशा यह कहा जाता है कि मुस्लिम समुदाय वंदे मातरम और भारत माता की जय बोलने से कतराता है लेकिन इस तिरंगा यात्रा के दौरान सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाये और इस तरह पूरी भिवंडी जय हिंद, इंक़लाब जिंदाबाद, वंदे मातरम, भारत माता की जय, वीर जवान – अमर रहें के नारों से गूंज उठी।

जानकारों के अनुसार पुलवामा हमले के दो कारण है।

पहला पैरामिलिट्री सुरक्षा बलों को मुख्य सुरक्षाबलों के बराबर अधिकार नही दिये गये हैं जिसकी वजह से नक्सली और आतंकवादी प्रभावित क्षेत्रों में उन्हें निशाना बनाया जाता है। इसी विषय को लेकर भिवंडी माँगे जवाब टीम ने पैरामिलिट्री सुरक्षा बलों को मुख्य सुरक्षाबलों के समान अधिकार दिये जायें और उन्हें पेंशन भी दी जाये इसकी माँग मेमोरेंडम द्वारा की है।
सीआरपीएफ पर हमले का दूसरा कारण जम्मू कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ़्ती मुहम्मद सईद के 2014 के उस फैसले को बताया जाता है जिसमे उन्होंने आदेश जारी कर सुरक्षा बलों द्वारा चेक पोस्ट पर गाड़ी रोककर जाँच करने पर रोक लगा दी थी। ऐसा आदेश एक घटना के चलते हुए दिया गया था। आपको ज्ञात हो कि छतेरगाम कश्मीर में 3 नवंबर 2014, को एक मारुति 800 कार जिसमे 5 लड़के सवार थे उन्होंने सुरक्षाबलों के दो चेकपॉइंट को तोड़कर जैसे ही तीसरे चेकपॉइंट बिना गाड़ी रोके पार किया वैसे ही 53 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने कार में आतंकवादी मौजूद होने के शक में कार पर फायरिंग शुरू कर दी और कार एक खंभे से जा टकराई। यदि कार में मौजूद लोगों ने चेकपॉइंट पर गाड़ी रोक दी होती तो फायरिंग नही होती। इस फायरिंग में 5 में से 2 लड़कों की गोली लगने से मौत हो गई और बाकी 3 को सुरक्षाबलों ने अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती करवाया। बाद में चडूरा पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज कर 11 जवानों को जेल भेज दिया और वो आजभी इसकी सजा काट रहे हैं। गौरतलब है कि कार में सवार लड़कों की सुरक्षाबलों के साथ सहयोग की जवाबदेही ना तय करके तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने सुरक्षाबलों को द्वारा लगाई जा रही चेकपोस्ट पर ही रोक लगा दी लेकिन, पुलवामा हमला यह बताता है कि यह एक बहुत ही गलत फैसला था जिसने 45 जवानों की जान ले ली। यदि सुरक्षाबलों को चेकपॉइंट लगाकर आने जानेवाली गाड़ियों को जाँच करने का अधिकार होता तो शायद जैश-ए-मुहम्मद का फिदायीन आतंकी आदिल अहमद डार सीआरपीएफ के काफिले तक पहुँच ही नही पाता।