उच्चतम न्यायालय में महात्मा गाँधी की हत्या की फिर से तहकीकात करानेवाली याचिका खारिज…

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उच्चतम न्यायालय में महात्मा गाँधी की हत्या की फिर से तहकीकात करानेवाली याचिका खारिज…

मुंबई के शोधकर्ता एवं अभिनव भारत चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी पंकज फडणीस ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिसमे यह माँग की गई थी कि, महात्मा गाँधी की हत्या की फिर से जाँच हो। हम आपको बता दें कि, पंकज फडणीस की यह दूसरी याचिका है। इस तरह की उनकी एक याचिका 28 मार्च, 2018 को पहले ही खारिज कर चुकी है।
इस याचिका में पंकज फडणीस ने कहा है कि, कुछ फोरेंसिक रिपोर्ट और नए दस्तावेज सामने आये हैं जिसे ध्यान में रखते हुये महात्मा गाँधी की हत्या का मामला फिर से चलना चाहिये। अगर मामला फिर से उच्चतम न्यायालय में चलता है तो महात्मा गाँधी की हत्या को लेकर अब तक के जितने भी शक और गलत धारणायें है उनको दूर कर किया जा सकता है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायाधीश एल एन राव की पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने बड़ी सूक्ष्मता से याचिका और पेश किये गये दस्तावेजों को देखा है लेकिन इसमें ऐसा कोई आधार नही है जिससे महात्मा गाँधी की हत्या का मामला दोबारा चलाया जाये।

अपनी याचिका में पंकज फडणीस ने दो किताबों का जिक्र किया है, “व्हू किल्ड गाँधी” जो लौरेंको दी सल्वादोर द्वारा 1963 में लिखी गयी थी। और दूसरी किताब “इंडिया रिमेंबर्ड” जो भारत के आखिरी गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन की पुत्री पामेला माउंटबेटन द्वारा लिखी गयी है। पंकज फडणीस ने अपनी याचिका में यह दावा किया है कि अगर इन दोनों किताबों को ध्यान से पढ़ा जाये तो पता चलता है सत्ता के शीर्ष में बैठा एक व्यक्ति महात्मा गाँधी की हत्या में शामिल था। हालाँकि याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से याचिका में किसी का भी नाम नही लिया है।

30 जनवरी, 1948 को महात्मा गाँधी की हत्या हुई और 10 फरवरी, 1949 को एक ट्रायल कोर्ट ने 9 में से 7 आरोपियों को सजा सुनाई। महात्मा गाँधी की हत्या में कुल 9 लोगों पर हत्या, हत्या की साजिश और कोशिश का मामला चलाया गया था। इस हत्याकांड में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फाँसी की सजा सुनाई गई थी। अगर 9 में से 7 लोगों को सजा हुई तो बाकी के 2 लोग कहाँ है? उन 2 लोगो मे से विनायक दामोदर सावरकर बरी हो गए थे और एक आरोपी का अब तक पता नही चला। नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे पर गाँधीजी को 3 गोलियाँ मारने के लिए “तीन बुलेट सिद्धांत” पर फाँसी की सजा सुनाई थी और याचिकाकर्ता पंकज फडणीस इसी सिद्धांत को नकार रहे हैं।

“तीन बुलेट सिद्धांत” को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता के पास 3 आधार हैं जिसमे से एक का जिक्र इस लेख के तीसरे पैराग्राफ में किया जा चुका है अब बात करते है दूसरे आधार की। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता के तथ्यों पर भरोसा करके फैसला लिया लेकिन एमिकस रिपोर्ट पर अधिवक्ता द्वारा की गई टिप्पणियों को उच्च्तम न्यायालय ने तरजीह नही दी

तीसरे आधार में याचिकाकर्ता ने फोरेंसिक रिपोर्ट, फ़ोटो और महात्मा गाँधी के शरीर पर लगे घावों का उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि, यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रसिद्ध विशेषज्ञ से एक रिपोर्ट प्राप्त की है, जिसमे स्पष्ट रूप से पुष्टि की गई है कि, एक फोटो में महात्मा गाँधी के शरीर पर चार घाव थे। यह फोटो विशेषज्ञ को राष्ट्रीय गाँधी संग्राहलय, दिल्ली से मिली थी जो कि 31 जनवरी, 1948 में एक सुप्रसिद्ध अखबार में छापी गयी थी और जो पिछले 70 वर्षों से संग्राहलय में प्रदर्शित की जा रही है।
इस कड़ी में पहला और तीसरा आधार बहुत महत्वपूर्ण है, याचिकाकर्ता पहले दावे में कह रहे हैं कि महात्मा गाँधी की हत्या में उस समय का रसूखदार व्यक्ति भी गाँधी की हत्या में उलझा था जिसका पता ऊपर दी गयी 2 क़िताबों को ध्यान से पढ़ने पर चलता है और तीसरे दावे में वह यह कहते हैं कि, अदालतों ने “तीन बुलेट सिद्धांत” पर सजा सुनाई थी बल्कि महात्मा गाँधी के शरीर पर चार घाव थे तो इसका मतलब चौथी गोली भीड़ में से किसी और ने भी चलाई थी जिसका पता आज तक नही लग पाया।

याचिकाकर्ता ने महात्मा गाँधी की हत्या से जुड़ी इन्ही सब गुथमगुथ्था पहेलियों को सुलझाने के लिये याचिका दायर की थी कि, महात्मा गाँधी की हत्या की फिर से जांच और छुपे हुए तथ्य बाहर आये और लोगों तक सही जानकारी पहुँचे बैरहाल उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका को निरस्त कर दिया है।