उल्हासनगर में धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग हुई तेज़ (एन्टी कन्वर्शन )

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क्यों उल्हासनगर में उठ रही है धर्मांतर विरोधी कानून ( Anti Conversion Law ) की मांग ..??

उल्हासनगर में धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti Conversion Law) की मांग हुई तेज़

उल्हासनगर :उल्हासनगर सिंधी समाज का एक बहुसंख्यक क्षेत्र है जो विभाजन के बाद मुंबई से सटे 58 किलोमीटर की दूरी पर बसाया गया एक शहर है!
कुछ वर्षों में सिंधी हिंदुओं का बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है । जिसका का एक बड़ा तबका ईसाई धर्म में परिवर्तित हो रहा है। इन 5 वर्षों में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की 30,000 सिंधिया ने ईसाई धर्म अपना लिया है । इस बात को लेकर सिंधी समाज के धर्मगुरु सामाजिक एवं धार्मिक नेतृत्व में काफी रोष है ।
दोपहर का सामना 12 जून 2018 को प्रकाशित एक खबर के अनुसार उल्हासनगर में ऐसे कई छोटे-छोटे चर्च ऐसी इमारतों के भीतर चलते हैं । जिसे हाउस चर्च भी कहा जाता है ।इन छोटे-छोटे चर्च में लोग जाकर प्रार्थना करते हैं!
इस विषय को लेकर जब हमारी टीम ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि यह धर्म परिवर्तन केवल दो कारणों के वजह से हो रहे हैं एक अल्पसंख्यक दर्जा मिलने के खातिर और दूसरा है प्रलोभन! इस लगातार बढ़ते धर्मांतरण में सबसे अहम चिंता जताई यह जा रही है कि जो सिंधी हिंदू चर्च जाते हैं उन्होंने अभी तक अपना नाम नहीं बदला है..! जिसे कई सिंधी लोग साजिश के रूप में देख रहे हैं ।
इस धर्मांतरण को रोकने हेतु एवं धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने हेतु हिंदू जनजागृति समिति के नेतृत्व में सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया, जय झूलेलाल सेवा संघर्ष समिति ,प्रबळ संगठन ,विश्व सिंधी समाज संघ एवं उल्हासनगर व्यापारी संगठन मैदान में उतर चुके हैं । इनका कहना है कि जब तक धर्मांतरण विरोधी कानून नही बनता तब तक कोई शांत नही बैठेंगे ।